April 2014


Expected Launch: May 2014
Expected Price: 5 - 7.70 lakhs

Toyota Etios Cross Preview

Toyota recently launched the Etios Cross for the Brazilian market and it is expected to now make its Indian debut at the 2014 Auto Expo. Much like the Volkswagen Cross Polo and the Ford EcoSport, it will be the Japanese automaker’s entry into the rapidly expanding compact crossover segment. It has been spotted running in and around Pune which means that it is likely to have got its ARAI approval and will go on sale shortly after the Auto Expo.
Exterior
The Toyota Etios Cross is a beefed up version of the standard car and much like the Cross Polo, it gets a large plastic based body kit. This is further enhanced in terms of overall toughness through the use of taller wheels and contrast coloured roof rails which can hold luggage up to the range of 50kgs-55kgs. The overall design of the car is pretty much the same as the Etios Liva hatchback. Other changes from the standard car include the Etios Cross lettering on the side.
Interior
The interiors and the feature list remain the same as the standard car with the exception of some new seat fabrics and trim accents. We expect that Toyota will offer the Etios Cross only in the top spec petrol and diesel variants which means that it will get the same feature list and cabin design including the centrally mounted speedometer and gauges. This is currently the case with the Brazilian spec car so we expect that the Indian one will be no different.
Engines
The India spec Etios Cross will get the 1.2-litre petrol unit that produces 79bhp and 104Nm of torque as well as the 1.4-litre diesel unit that does 67bhp and 170Nm of torque. Both engines have been mated to a five-speed manual. There is a possibility of a TRD Sportivo unit that will get the 1.5-petrol engine and the same 1.4-litre diesel unit.
Competition and price
The Toyota Etios Cross will compete with the VW Cross Polo, Ford EcoSport, Renault Duster and the Nissan Terrano of which the latter two will be in the lower spec variants. It is also expected to get competition in the form of the Mahindra S-101 which will see the light of the day sometime this year. It is expected to be priced Rs 20,000 to Rs 30,000 more than the standard car. The model sold in India will be locally produced at Toyota’s factory outside Bengaluru and so will have a large amount of localisation, definitely more than the Cross Polo and so that should give it an advantage.
Toyota Etios Cross First Look Video
The 2014 Toyota Etios Cross gets all black interiors to go with the sporty theme of the car. The plastic around the centre console, door trimming, over the instrument cluster etc are finished in piano black plastic, while the fabric used on the seats, doors etc. are black. The 3-spoke steering wheel is black with silver inserts, the gear-lever gets the same treatment as well.



Paint options
The 2014 Toyota Etios Cross gets one new paint option over the Etios Liva hatchback, Inferno Orange. The other paint options include Celestial Black, Classic Grey, Harmony Beige, Symphony Silver, Ultramarine Blue, Vermilion Red and White.
बाल गिरना तो एक आम समस्या है। आजकल युवावस्था में ही लोगों के बाल गिरने लगे हैं। बालों का गिरना  किसी के लिए भी तनाव और चिंता का कारण होता है। बालों के समय से पहले गिरने की समस्या यदि आनुवंशिक हो तो उसे एंड्रोजेनिक एलोपेसिया कहा जाता है। 

इस समस्या से परेशान पुरुषों में बाल गिरने की समस्या किशोरावस्था से ही हो सकती है, जबकि महिलाओं में इस प्रकार बाल गिरने की समस्या 30 की उम्र के बाद उत्पन्न होती है। इसके अलावा, खान-पान और पर्यावरण प्रदूषण, दवाई के रिएक्शन व कई अन्य कारणों की वजह से कम उम्र में गंजेपन की समस्या हो सकती है। यदि आप भी कम उम्र में गंजेपन की समस्या से जूझ रहे हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं गंजापन दूर करने के कुछ  घरेलू उपाय....
 - जटामांसी को नारियल तेल में उबाल लें। इस तेल को ठंडा करके किसी बोतल में भरकर रख लें। रोजाना रात को सोने से पहले इसकी मालिश करें। बालों का असमय सफेद होना और गिरना बंद हो जाता है।
-  नमक का अधिक सेवन करने से भी गंजापन आ जाता है। नमक और काली मिर्च एक-एक चम्मच और नारियल का तेल पांच चम्मच मिलाकर गंजेपन वाले स्थान पर लगाने से बाल फिर आ जाते हैं।
- हल्के गर्म जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगा लें। 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से बाल धोएं। कुछ दिनों बाद बाल गिरने की समस्या दूर हो जाएगी।
 -  आंवले के चूर्ण को दही में मिला लें। इस पेस्ट को हल्के हाथों से बालों की जड़ों में लगाएं। एक घंटे बाद बाल धो लें। लगातार सप्ताह में दो बार यह नुस्खा अपनाने से बाल गिरना कम हो जाते हैं।

- कलौंजी को पीसकर पानी में मिलाएं और इस पानी से बाल धोएं। माना जाता है कि कलौंजी के पानी से बाल घने होते हैं।
- दो लीटर पानी में थोड़ा आंवले का चूर्ण और नीम की पत्तियां डालकर पानी को उबाल कर आधा कर लें। इस पानी से सप्ताह में कम से कम एक बार बाल धोएं। बाल गिरना बंद हो जाएंगे।
- यदि आप नशीले पदार्थों का सेवन या धूम्रपान करते हैं तो बंद कर दें। बाल गिरना जल्द ही कम हो जाएंगे। अधिक से अधिक पानी पिएं। चाय- कॉफी का सेवन कम कर दें।

- सरसों के तेल में मेहंदी की पत्तियां डालकर गर्म करें। ठंडा करके बालों में लगाएं। रोजाना इसे लगाने से बालों का गिरना रुक जाता है।

- मेथी के बीजों का उपयोग करें- 
रात में मेथी के बीजों को पानी में भिगो दें और सुबह इन्हें पीसकर बालों पर लेप करें। एक घंटे बाद बाल धो लें। ऐसा करने से कुछ दिनों में नए बाल आने लगेंगे।

- नारियल के तेल में कपूर मिलाएं। बाल धोने से एक घंटा पहले इस तेल को अच्छी तरह बालों में लगाएं। बाल गिरना बंद हो जाएंगे।
 - एक-चौथाई कप प्याज के रस में थोड़ा शहद मिलाएं। इस मिश्रण को बालों की जड़ों में लगाएं। बाल गिरने की समस्या खत्म हो जाएगी।
- एक प्याज काटकर रम से भरे एक गिलास में डाल दें। इसे रात भर रखा रहने दें। दूसरे दिन रम को छान लें। प्याज के टुकड़े अलग हो जाएंगे। इस रम से बालों की मसाज करें। हफ्ते में दो बार ऐसा करने से बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
- एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर में थोड़ा जैतून का तेल मिलाकर पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को बालों में लगा लें। 15 मिनट बाद गर्म पानी से बाल धोएं। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों बाल गिरने की समस्या दूर हो जाएगी।
- अमरबेल को पानी में उबालें। इस पानी से बाल धोने से बाल गिरने की समस्या खत्म हो जाती है।

- शिकाकाई के बीजों को थोड़ा पानी डालकर पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को रातभर रखा रहने दें। सुबह इस पेस्ट को बालों में लगा लें। आधे घंटे बाद बाल धो लें। यह नेचुरल शैम्पू का काम करता है। इसके इस्तेमाल से बाल गिरने की समस्या दूर हो जाती है। साथ ही, बाल स्वस्थ और चमकदार हो जाते हैं।

- अमरबेल को पीसकर उसका रस निकाल लें। इस रस को तिल के तेल में डालकर उबालें। तेल को तब तक उबाले जब तक कि पूरा रस तेल में अच्छे से मिल न हो जाए। रोज रात को सोने से पहले इस तेल से बालों की जड़ों में मसाज करें। इससे गंजापन दूर होता है और बाल सिल्की और शाइनी हो जाते हैं।
 - मेथी की सब्जी का ज्यादा सेवन बालों की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। - मेथी दानों को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इन्हें पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों में लगाएं। आधे घंटे बाद सिर धो लें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से बाल गिरने की समस्या दूर हो जाती है।
- गेंदे के फूलों को पीसकर उनका रस निकाल लेंं। इनके रस को नारियल तेल में डालकर उबाल लें। इसे तब तक उबालें जब तक कि तेल में रस पूरी तरह मिश्रित न हो जाए। इसके बाद तेल को ठंडा करके किसी बोतल में भर लें। इस तेल को लगाने से बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
- जैतून के तेल को हल्का गर्म कर लें। इस तेल में बहेड़ा का चूर्ण मिलाएं। इस मिश्रण को बालों की जड़ों में लगाएं। एक घंटे बाद बाल धो लें। बाल घने होने लगेंगे।

 - गुड़हल के फूलों का रस निकाल लें। इससे बालों की मसाज करें। एक घंटे बाद सिर धो लें। बाल काले, घने और मजबूत हो जाएंगे।
Samsung Galaxy Tab3 Neo tablet now officially available at Rs. 16,750

The Samsung Galaxy Tab3 Neo tablet runs Android 4.2 Jelly Bean out-of-the-box with Samsung TouchWiz UI on top. It features a 7-inch WSVGA (1024x600 pixel) display. The Galaxy Tab3 Neo tablet comes in two variants, Wi-Fi and 3G (which is now listed on company's online store).
USP:     
- Super Light, Slim Design
- 7 Inch WSVGA Screen
- 1.2 GHz Dual Core Processor
- 1GB RAM
- 8GB On-Board Storage
- 2MP Rear Camera
- Micro-SIM
- 3G With Voice Call
- Wi-Fi
- Bluetooth
- 32 GB Expandable Memory
- 3600 MAh Battery





Network/Bearer
SIM size Micro-SIM
2G GSM B8 (GSM 850MHz),B11 (R-GSM 900MHz),B13 (DCS 1800MHz),B14 (PCS 1900MHz)
3G UMTS B1 (IMT 2100MHz),B8 (GSM 900MHz)

Connectivity
USB Version USB 2.0
Location Technology GPS,Glonass
Earjack 3.5mm Stereo
Wi-Fi 802.11 b/g/n 2.4GHz
Wi-Fi Direct Yes
Bluetooth Version BT 4.0
Bluetooth Profiles A2DP,AVRCP,DI,HFP,HID,HSP,MAP,OPP,PAN,PBAP

OS
Android

Display
Technology (Main Display) TFT
Size (Main Display) 17.8cms
Resolution (Main Display) 1024 x 600 (WSVGA)
Color Depth (Main Display) 16M

Processor
CPU Speed 1.2GHz
CPU Type Dual-Core

Memory
RAM Size (GB) 1GB
External Memory Support MicroSD (up to 32GB)

Camera
Video Recording Resolution VGA (640 x 480), @24fps
Main Camera - Resolution CMOS, 2.0 MP

Sensors
Accelerometer

Physical specification
Dimension (HxWxD) 193.4mm x 116.4mm x 9.7mm
Weight 322g

Battery
Standard Battery Capacity 3600mAh
Talk time (W-CDMA) Up to 20h

Audio and Video
Video Playing Resolution FHD (1920 x 1080), @30fps
Audio Playing Format MP3, M4A, 3GA, AAC, OGG, OGA, WAV, WMA, AMR, AWB, FLAC, MID, MIDI, XMF, MXMF, IMY, RTTTL, RTX, OTA

Services and Applications
S-Voice Yes
बेबीमून शब्द इनदिनों  खूब चलन में है। आपने अक्सर सुना होगा कि बच्चे के जन्म से पहले कपल्स बेबीमून पर जा रहे हैं। या फिर बेबीमून की प्लानिंग कर रहे हैं। ऐसे में आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि बेबीमून आखिर होता क्या है।
बेबीमून
'बेबीमून'  में पति अपनी गर्भवती पत्नी के साथ टाइम स्पेंड करता है। इसके लिए दोनों ही अपनी पसंदीदा जगह का चुनाव करते हैं, वहां जाकर एक दूसरे के साथ खूबसूरत वक्त बिताते हैं। बेबीमून में जाने से पहले कपल्स  बाकायदा पूरी प्लानिंग करते हैं कि उन्हें किस जगह और किस वातावरण में टाइम स्पेंड करना है। कपल्स को सही वक्त पर  बेबीमून पर जाना चाहिेए।
बेबीमून पर ही कपल्स होने वाले बच्चे के भविष्य के बारे में बातचीत करते हैं और आने वाली जिम्मेदारियों के बारे में प्लानिंग करते हैं। आप समुद्र किनारे किसी होटल, हिल स्टेशन और अपने पसंदीदा शहर, कहीं भी बेबीमून मना सकते हैं। बस इसके लिए कपल्स की आपसी रजामंदी होना जरूरी है।
बेबीमून शब्द सबसे पहले नब्बे के दशक में सामने आया। उस वक्त बच्चे के जन्म के बाद मां-बाप जो वक्त एक साथ बिताते थे। उसे बेबीमून कहा जाता था। इसके लिए वे बाकायदा प्लानिंग करते थे और अपनी पसंदीदा जगह पर न्यू-बॉर्न बेबी के साथ कपल्स वक्त बिताते थे।
इसके बाद 2006 के बाद बेबीमून का स्वरूप बदला। अब कपल्स बेबी के होने से पहले जो छुट्टियां साथ बिताने लगे उसे बेबीमून कहा जाने लगा। इस वक्त यह खूब प्रचलन में है। मां-बाप बनने वाले कपल्स बच्चे के जन्म से पहले कुछ दिन साथ बिताते हैं। इन दिनों में वो अपनी पसंदीदा जगह की ट्रैवलिंग करते हैं। बच्चे के लिए प्लानिंग करते हैं। इसके अलावा, आने वाली जिम्मेदारियों के ऊपर बातचीत करते हैं।
बेबीमून के लिए परफेक्ट टाइमिंग 18 से लेकर 24 वें सप्ताह के बीच मानी जाती है। इसके अलावा आप गर्भावस्था के मिड पीरियड में भी बेबीमून पर जा सकते हैं। बेबीमून को लेकर अलग-अलग राय है कई लोग कहते हैं कि 14 से लेकर 28वें सप्ताह के बीच बेबीमून पर जाना उपयुक्त रहता है।
बेबीमून पर जाते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिस एयरलाइन में आप जा रहे हैं कहीं उसमें डिलीवरी के कुछ सप्ताह पहले प्लाइनिं प्रतिबंधित न हो। कई ऐसी एयरलाइन हैं जो डिलीवरी के कुछ हफ्ते पहले फ्लाइनिंग नहीं करने देती हैं। बुकिंग से पहले इस बात को चेक कर लें, ताकि आपका टिकट बर्बाद न जाए।
डेस्टिनेशन का चुनाव
बेबीमून पर जाने से पहले डेस्टिनेशन तय कर लें। ध्यान रहे कि डेस्टिनेशन पति-पत्नी दोनों की रजामंदी का होना चाहिए। अगर आप पहले से ही तय डेस्टिनेशन पर बेबीमून मनाने जाएंगे तो खूब मस्ती भी कर पाएंगे और बिना किसी परेशानी और आपसी मनमुटाव के रिलेक्स भी करेंगे।

ऐसा माना जाता है कि दिन की शुरुआत अच्छी हो तो पूरे दिन सब अच्छा ही अच्छा होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्राचीन समय से ही कुछ परंपराएं बनाई गई हैं। इन परंपरागत कामों को नियमित रूप से करने पर चमत्कारी रूप से शुभ फल प्राप्त होते हैं। यहां जानिए पांच परंपरागत काम, जो रोज सुबह-सुबह करना चाहिए... इन कामों से आप दिनभर भाग्यशाली बने रह सकते हैं...
दही खाकर निकलें

घर से निकलने से पहले दही का सेवन अवश्य करना चाहिए। यह परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही है। दही को पवित्र माना जाता है। इसकी पवित्रता और स्वाद से मन प्रसन्न होता है। इसी वजह से इसे पूजन सामग्री में भी खास स्थान प्राप्त है। दही खाने से विचार सकारात्मक होते हैं और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिल जाती है। आप चाहें तो दही में चीनी भी मिला सकते हैं।
तुलसी का पूजन करें और इसके पत्तों का सेवन करें

सामान्यत: तुलसी का पौधा सभी के घरों में होता है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी को पवित्र और पूजनीय माना जाता है। जिस घर में तुलसी का पूजन प्रतिदिन होता है, वहां महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। पैसों से संबंधित परेशानियां घर में नहीं रहती हैं। तुलसी एक औषधीय पौधा भी है। प्रतिदिन तुलसी के पत्तों का सेवन करने से कई रोगों से बचाव हो जाता है। साथ ही, तुलसी से पुण्य लाभ भी प्राप्त होते हैं।
घर के मंदिर में विराजित भगवान का दर्शन करें

घर के मंदिर में विराजित देवी-देवताओं के दर्शन प्रतिदिन करना चाहिए। घर से निकलने से पहले एक बार इनके सामने कार्यों में सफलता की प्रार्थना की जाए तो व्यक्ति का दिन शुभ रहता है। भगवान की कृपा बनी रहती है।
घर से निकलने से पहले सीधा पैर बाहर रखें

किसी भी कार्य का प्रारंभ सीधे हाथ और सीधे पैर को आगे बढ़ाकर किया जाए तो सफलता मिलने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार यदि धार्मिक कर्म सीधे हाथ से किए जाएं तो अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। ठीक इसी प्रकार घर से निकलने से पहले सीधा पैर बाहर रखते हैं तो यह शुभ शकुन होता है। ऐसा करने पर कार्यों के प्रति सकारात्मक सोच भी बनती है।
माता-पिता एवं बुजुर्गों का आशीर्वाद लें

प्रतिदिन घर से निकलने से पहले माता-पिता का आशीर्वाद लेना चाहिए। जिन लोगों से उनके माता-पिता प्रसन्न रहते हैं, उनसे सभी देवी-देवता भी प्रसन्न रहते हैं। इसके विपरीत जो लोग माता-पिता का सम्मान नहीं करते और उन्हें दुख देते हैं, वे कभी भी सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं। अत: घर से निकलने से पूर्व माता-पिता और बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना बहुत शुभ होता है। माता-पिता के आशीर्वाद से सभी प्रकार की बुरी बलाएं दूर हो जाती हैं और कार्यों में सफलता के योग बनते हैं।

लाइफस्टाइल डेस्क. प्रेग्नेंसी का पता चलने के बाद अक्सर महिलाएं कुछ बातों की कम जानकारी होने की वजह से ऐसे कदम उठा लेती हैं, जो आगे चलकर डिलिवरी के दौरान मुश्किल पैदा कर सकते हैं। कुछ एहतियात बरतकर इन कठिनाइयों से बचा जा सकता है।
प्रेग्नेंसी एक ऐसा वक्त होता है, जो हर महिला के लिए बहुत खुशियां लेकर आता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह थोड़ा क्रिटिकल टाइम होता है। अब आप पर एक और जान की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ बातों का खास ध्यान रखकर इस दौरान आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।
एकदम न बढ़ाएं डाइट
अक्सर प्रेग्नेंसी की खबर मिलते ही घरवाले महिला की अधिक केयर करने लगते हैं। ऐसा करना ठीक है, लेकिन कुछ बातों को ध्यान रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों में महिलाओं को जी-मचलाना, उल्टी, बदहजमी और गैस जैसी शिकायतें आम होती हैं। इसलिए इन महीनों के दौरान खाने की मात्रा को बढ़ाने की जरूरत नहीं होती। इसके स्थान पर डाइट में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल वाले हल्के खाने को शामिल करना चाहिए। 
नाश्ते को न करें दरकिनार
प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में अक्सर महिलाएं ऑफिस या घर के कामकाज में सामान्य तौर पर लगी रहती हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन प्रेग्नेंसी का पता चलने के बाद नाश्ते को बिल्कुल अवॉइड नहीं करना चाहिए। पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता लेने के बाद यदि महिलाओं को दिन के आहार में थोड़ा कम पोषण मिले, तो यह होने वाले बच्चे की सेहत पर ज्यादा असर नहीं डालता।
इसके साथ ही सुबह के समय थोड़ा-बहुत खाने से दिनभर गैस और एसिडिटी की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। 
लालच पर नियंत्रण रखें
महिलाओं में चटपटा खाने की आदत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होती है। यह आदत प्रेग्नेंसी के दौरान और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाएं चुपचाप चाट, पानीपुरी, भेल जैसी चीजें खाने की कोशिश करती हैं। ये चीजें आने वाले नन्हे मेहमान की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा मसालेदार और चटपटी चीजों का सेवन करने से महिलाओं को कई तरह की परेशानी हो सकती है।
कभी न भूलें एक्सरसाइज करना
प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने खानपान के साथ ही फिजिकल फिटनेस की तरफ भी विशेष ध्यान देना चाहिए। एक बार प्रेग्नेंसी का पता चल जाने के बाद नियमित एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। इससे बॉडी आने वाले मेहमान को संभालने के लिए तैयार हो जाती है।
एक्सरसाइज के साथ हल्का योग और प्राणायाम भी लाभकारी होगा। दिन में कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।
56% भारत के शहरी इलाकों की महिलाओं को अपनी डाइट में परिवर्तन के लिए डॉक्टर की सलाह लेने की आदत नहीं है।
(नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे)

स्वास्थ्य का सीधा संबंध जिंदगी से हैं। इंसान के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ उसके जीने के अधिकार का घोर उल्लंघन है। आज बड़ी तादाद में दवाइयों के दामों में इजाफा करके उसके इस जीने के अधिकार को छीना जा रहा है। मुनाफाखोरी, बाजारीकरण और लाभ से वशीभूत दवाई कंपनियां गरीबों को स्वास्थ्य के अधिकार से वंचित रखने की साजिश में लिप्त हैं। ब्रांड के नाम पर मरीजों से मनमाफिक पैसा वसूला जा रहा है। ऐसे में दवाइयों में होने वाले खर्च से परेशान होकर कई मरीज इलाज बीच में ही छोड़ने पर मजबूर हैं। यहां सवाल उठता है कि क्या ब्रांडेड दवाइयों की खरीद के अलावा हमारे पास कोई विकल्प है। इसका जवाब है- हां, विकल्प जेनरिक दवाइयां हैं।
क्या है जेनरिक दवाइयां
जेनरिक दवाइयों को लेकर अभी लोगों में काफी भम्र है। वो इसे मूल दवा से अलग समझते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। दवा का सॉल्ट वही होता है, बस कंपनी का नाम बदल जाता है। इसके अलावा, इसे इस तरह भी समझा जा सकता है जो दवाइयां पेटेंट फ्री होती हैं वो जेनरिक दवाइयां हैं।
नोट: हर साल 7 अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है। इसकी शुरुआत  वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन  (WHO) ने 1948 में की थी।  
नरिक दवाइयों और ब्रांडेडे के सॉल्ट में कोई अंतर नहीं होता है। अमेरिका की फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन का भी मानना है कि जेनरिक दवाइयां भी उतनी ही प्रभावी और सेफ होती हैं जितनी की ब्रांडेड दवाइयां। जनेरिक दवाइयों पर अनेक सेमिनार कर चुके प्रतिभा जननी सेवा संस्थान के राष्ट्रीय समन्वयक आशुतोष कुमार का कहना है- ‘हिंदुस्तान के बाजारों में जो कुछ बिक रहा है अथवा बेचा जा रहा है, उसकी मार्केटिंग का एक बेहतरीन फार्मूला है भ्रम फैलाओ, लोगों को डराओ और मुनाफा कमाओ। जो जितना भ्रमित होगा, जितना डरेगा उससे पैसा वसूलने में उतनी ही सहुलियत होगी।‘
दवाइयों की कॉस्ट तब बढ़ती है जब उसे ब्रांड का नाम देकर उसकी मार्केटिंग की जाती है। कंपनियां दवाई की लागत से मार्केटिंग तक के खर्च को उपभोक्ता से वसूलती हैं। दवाई के लागत मूल्य से कई सौ गुना ज्यादा में उसे उपभोक्ता को बेचा जाता है। जितना बड़ा ब्रांड उतनी ही महंगी दवाई। ये फॉर्मूला इस दिशा में बेहद कारगर है। ऐसा नहीं है कि सरकार जेनरिक दवाइयों के महत्व को नहीं समझती है। इस वक्त देश में सवा सौ के आसपास जेनरिक दवाइयों की दुकानें हैं, जो मरीजों को सस्ते दामों पर दवाई उपलब्ध करा रही हैं। 2011 में बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने अपने शो सत्यमेव जयते में महंगी दवाइयों के विकल्प के रूप में उभरी जेनरिक दवाइयों को चर्चा में लाकर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण काम किया।
ब्रांड के नाम पर मनमानी कीमत वसूलने के खिलाफ संघर्ष करने वाली ' प्रतिभा जननी सेवा संस्थान' का कहना है कि भारत जैसे देश में 32-35 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। ऐसे में दवाइयों को ब्रांड के नाम पर बेचने की जरूरत क्या है। संस्था के समन्वयक आशुतोष कुमार का कहना है कि इस देश को दवा की ज़रूरत है न की ब्रांड की।
भारत में दवाइयों के मूल्य का निर्धारण एनपीपीए करती है। इसके लिए भारत सरकार ने 348 सॉल्ट का नाम निर्धारित किया है। पहले इनकी संख्या 74 थी। यहां एक बात ध्यान रखने योग्य है कि भारत में वैसे भी 12-13 दवाइयों पर ही रिसर्च हुई है, बाकि की रिसर्च सब विदेशों में ही होती है। हालांकि, कई बार किसी खास दवा की ज़्यादा ज़रूरत को देखते हुए सरकार उसकी जेनरिक बनाने का आदेश भी देती है।
वैसे भी आज जेनरिक और ब्रांड के बीच इतनी धांधली हो चुकी है कि आम जेनरिक दवाइयों को भी ब्रांड के नाम से बेचा जा रहा है। सरकार का कहना है कि दवाई कंपनियों की दवाइयों पर 1126 प्रतिशत का फायदा होता है जबकि समाजसेवी संस्थाओं का मानना है कि यह फायदा तीन हजार प्रतिशत तक होता है। सरकार का भी कहना है कि अगर दवाई का कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन एक रुपया है तो उसका एमआरपी दो रुपए हो सकता है, जबकि ऐसा नहीं होता है कॉस्ट से कई गुना ज़्यादा की कीमत पर दवाइयों को बेचा जाता है।
देश में कई राज्य ऐसे हैं जहां राज्य सरकार के आदेश से जेनरिक दवाइयां बेची जाती हैं। राजस्थान में साल 2008 से ही जेनरिक दवाइयां बेची जा रही हैं। इस मामले में तमिलनाडू सबसे सजग राज्य है। यहां सन् 1995 से ही राज्य सरकार के आदेश पर जेनरिक दवाइयां बेची जा रही हैं।
यहीं नहीं, आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत से हर साल विदेशों में 45,000 करोड़ रुपए की जेनरिक दवाइयों का निर्यात होता है। अमेरिका में ब्रांड नाम की कोई चीज नहीं है। वहां जनेरिक दवाइयां ही बेची जाती हैं। जेनरिक की तुलना में ब्रांडेड दवाइयां कितनी महंगी बेची जाती हैं, इसे ऐसे समझा जा सकता है। एंटीबायटिक के रूप में प्रयोग होने वाली दवा एजीथ्रोमाइसिन सामान्य तौर पर 58 रुपए( 10 टेबलेट ) में मिलती है, लेकिन ब्रांडेड की कीमत 200-300 रुपए है।
दवा के पेंटेंट के संबंध में अलग-अलग देशों में भिन्न-भिन्न समय सीमा तय है। भारत में बाजार में आने के 20 वर्षों के बाद उस दवा के उस फार्मूले का स्वामित्व खत्म हो जाता है।
Life are directly related to health . Human rights violations , for his health is messing with . Today, a large increase in the prices of medicines is taking away the right to live with her . Profiteering , marketization and pharmaceutical companies succumb to the benefit of the poor are engaged in a conspiracy of denial of the right to health . A friendly brand name to extort money from patients being. Frustrated with the cost of medicines that treat many patients are forced to dropout . Here the question arises whether we have no option than buying branded pharmaceuticals . The answer is - yes , there are alternative generic medicines .

What is Generic Drugs

Generic drugs have the right people quite Bmr . They understand it's different from the original drug , whereas it is nothing . Salt of the drug is the same , just change the company name . In addition , it can also be understood that such drugs are patent -free drugs that are generic .

Note : World Health Day is celebrated every year on 7 April . Beginning the World Health Organisation (WHO) was founded in 1948 .

Nrik pharmaceuticals and Brandede is no difference in salt . The U.S. Food and Drug Administration also believes that generic medicines are as effective and safe as branded medicines. Several seminars have served on pharmaceuticals mother Jnerik talent coordinator of the National Institute Ashutosh Kumar says - " whatever is sold in the markets of India or being sold , its marketing is a great formula to spread confusion , and scare people earn profits . Which would confuse as much as it scared him to recover the money will Shuliyt the same . "

The rising cost of medicines when it is marketed by the brand name . The cost of medicine to marketing companies to charge the expenses to the consumer . Several hundred times higher than the cost price of the medicine is sold to the consumer . The bigger the more expensive brand medicine. The formula is highly effective in this direction . It is not that the government does not understand the importance of generic medicines . Fourteen hundred generic medicines in the country around the shops , the patients are providing medicines at cheap prices . Bollywood actor Aamir Khan in 2011 show ' Satyameva Jayate ' emerged as an alternative to expensive pharmaceuticals generics medicines is an important work in this direction by bringing into the discussion .

The brand name of the struggle against arbitrary price -to- recover 'the mother Service Institute says that in a country like India, 32-35 percent are below the poverty line . So what is the need to sell on brand name drugs . Ashutosh Kumar, coordinator of the institution need not say that the country 's brand of medicine .

NPPA is determining the value of pharmaceuticals in India . The Government of India set 348 is the name of salt . First , the number was 74 . One thing to note here is that the research on pharmaceuticals in India it is 12-13 , the rest of the Research all overseas grows by itself. However, often need more of a particular drug , the government is making to order the generics .

Between generics and brand it is today has been rigged so that the common generic drugs being sold by the brand name . The government says that drug companies would use drugs while on a 1126 percent profit social service institutions believe that it is three thousand percent .

Many states in the country where generic medicines are sold by order of the State Government . In Rajasthan, generic drugs are being sold since 2008 . In this case the conscious state of Tamil Nadu . From 1995 on the orders of the state government is selling generic medicines .

Not only may surprise you every year from India and abroad generic pharmaceuticals exports of Rs 45,000 crore . There is no brand name in the U.S. . There Jnerik drugs are sold . How expensive than branded generics medicines are sold , it can be understood . Antibiotics commonly used as a drug- Ajithromaisin 58 rupees ( 10 tablets ) joins , but the branded price is Rs 200-300 .

In respect of a patent medicine isolated countries different deadlines .

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र हिंदू वर्ष का पहला महीना होता है। इस मास के शुक्ल पक्ष में नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। नवमी तिथि के दिन श्रीराम नवमी का उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में जन्म लिया था। इस बार श्रीराम नवमी का पर्व कल यानी 8 अप्रैल को है। 
इस बार ये पर्व मंगलवार को होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना जाता है और हनुमानजी भगवान श्रीराम के सबसे बड़े भक्त हैं। तंत्र शास्त्र के अनुसार ऐसे योग में कुछ विशेष उपाय करना बहुत ही शुभ रहता है। इन उपायों से न सिर्फ हनुमान बल्कि भगवान श्रीराम भी अति प्रसन्न होते हैं। जानिए इस दिन कौन-कौन से उपाय करें- 
 1- श्रीराम नवमी (8 अप्रैल, मंगलवार) के दिन सुबह स्नान करने के बाद बड़ के पेड़ का एक पत्ता तोड़ें और इसे साफ स्वच्छ पानी से धो लें। अब इस पत्ते को कुछ देर हनुमानजी की प्रतिमा के सामने रखें और इसके बाद इस पर केसर से श्रीराम लिखें। 
अब इस पत्ते को अपने पर्स में रख लें। साल भर आपका पर्स पैसों से भरा रहेगा। इसके बाद जब दोबारा श्रीराम नवमी का पर्व आए तो इस पत्ते को किसी नदी में प्रवाहित कर दें और इसी प्रकार से एक और पत्ता अभिमंत्रित कर अपने पर्स में रख लें।
2- श्रीराम नवमी के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। हनुमानजी को चोला चढ़ाने से पहले स्वयं स्नान कर शुद्ध हो जाएं और साफ वस्त्र धारण करें। सिर्फ लाल रंग की धोती पहने तो और भी अच्छा रहेगा। चोला चढ़ाने के लिए चमेली के तेल का उपयोग करें। साथ ही चोला चढ़ाते समय एक दीपक हनुमानजी के सामने जला कर रख दें। दीपक में भी चमेली के तेल का ही उपयोग करें।
चोला चढ़ाने के बाद हनुमानजी को गुलाब के फूल की माला पहनाएं और केवड़े का इत्र हनुमानजी की मूर्ति के दोनों कंधों पर थोड़ा-थोड़ा छिटक दें। अब एक साबूत पान का पत्ता लें और इसके ऊपर थोड़ा गुड़ व चना रख कर हनुमानजी को इसका भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद उसी स्थान पर थोड़ी देर बैठकर तुलसी की माला से नीचे लिखे मंत्र का जप करें। कम से कम 5 माला जप अवश्य करें।
मंत्र- 
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने।।
अब हनुमानजी को चढ़ाए गए गुलाब के फूल की माला से एक फूल तोड़ कर उसे एक लाल कपड़े में लपेटकर अपने धन स्थान यानी तिजोरी में रखें। आपको कभी धन की कमी नहीं होगी।
3- कल (8 अप्रैल, मंगलवार) सुबह स्नान आदि करने के बाद बड़ के पेड़ से 11 या 21 पत्ते तोड़े लें। ध्यान रखें कि ये पत्ते पूरी तरह से साफ व साबूत हों। अब इन्हें स्वच्छ पानी से धो लें और इनके ऊपर चंदन से भगवान श्रीराम का नाम लिखें। अब इन पत्तों की एक माला बनाएं। 
माला बनाने के लिए पूजा में उपयोग किए जाने वाले रंगीन धागे का इस्तेमाल करें। अब समीप स्थित किसी हनुमान मंदिर जाएं और हनुमान प्रतिमा को यह माला पहना दें। हनुमानजी को प्रसन्न करने का यह बहुत प्राचीन टोटका है।
4- श्रीराम नवमी के दिन घर में पारद से निर्मित हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करें। पारद को रसराज कहा जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार पारद से बनी हनुमान प्रतिमा की पूजा करने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। पारद से निर्मित हनुमान प्रतिमा को घर में रखने से सभी प्रकार के वास्तु दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध होता है। 
प्रतिदिन इसकी पूजा करने से किसी भी प्रकार के तंत्र का असर घर में नहीं होता और न ही साधक पर किसी तंत्र क्रिया का प्रभाव पड़ता है। यदि किसी को पितृदोष हो तो उसे प्रतिदिन पारद हनुमान प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए। इससे पितृदोष समाप्त हो जाता है।
5- अगर आप शनि दोष से पीडि़त हैं तो श्रीराम नवमी के दिन काली उड़द व कोयले की एक पोटली बनाएं। इसमें एक रुपए का सिक्का रखें। इसके बाद इस पोटली को अपने ऊपर से उसार कर किसी नदी में प्रवाहित कर दें और फिर किसी हनुमान मंदिर में जाकर राम नाम का जप करें इससे शनि दोष का प्रभाव कम हो जाएगा।
6- श्रीराम नवमी के दिन किसी हनुमानजी के मंदिर जाएं और वहां बैठकर राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। इसके बाद हनुमानजी को गुड़ और चने का भोग लगाएं। जीवन में यदि कोई समस्या है तो उसका निवारण करने के लिए प्रार्थना करें।
7- श्रीराम नवमी को शाम के समय समीप स्थित किसी ऐसे मंदिर जाएं जहां भगवान श्रीराम व हनुमानजी दोनों की ही प्रतिमा हो। वहां जाकर श्रीराम व हनुमानजी की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी के दीपक जलाएं। इसके बाद वहीं भगवान श्रीराम की प्रतिमा के सामने बैठकर हनुमान चालीसा तथा हनुमान प्रतिमा के सामने बैठकर राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। इस उपाय से भगवान श्रीराम व हनुमानजी दोनों की ही कृपा आपको प्राप्त होगी।
8- श्रीराम नवमी के दिन पास ही स्थित हनुमानजी के किसी मंदिर में जाएं और हनुमानजी को सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें और अपनी मनोकामना कहें। इससे हनुमानजी प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
9- यदि आप पर कोई संकट है तो श्रीराम नवमी के दिन नीचे लिखे हनुमान मंत्र का विधि-विधान से जप करें।
मंत्र 
ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा
जप विधि
- सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ  वस्त्र पहनें। इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें। पारद हनुमान प्रतिमा के सामने इस मंत्र का जप करेंगे तो विशेष फल मिलता है। जप के लिए लाल हकीक की माला का प्रयोग करें।

क्या हम इसकी तैयारी करते हैं कि हमारी जीवन यात्रा सकुशल संपन्न हो सके। हमें तथा हमारे आश्रितों को पैसे की कोई तंगी न हो? जब कुछ दिनों की यात्रा के लिए हम पूरी तैयारी करते हैं तो क्यों सालों-साल लंबी जीवन यात्रा के लिए वैसे ही जतन नहीं करते?
संस्कृत की एक सूक्ति के अनुसार अर्थोपार्जन करना, उसे बढ़ाना और उसकी रक्षा करना एक उद्देश्य है। बगैर कमाई के खर्च करने से धन का पहाड़ भी नष्ट हो जाता है।
ट्रेन से कई दिनों की सुदूर यात्रा के लिए भी हम पूरी तैयारी करते हैं। हम सामान पैक करते हैं। रास्ते के लिए खाने-पीने का भी इंतजाम करते हैं, ताकि हमारी यात्रा सकुशल संपन्न हो सके। यदि ट्रेन में अच्छा खाना नहीं मिलता तो उसके लिए भी जरूरी एहतियात बरतते हैं। परंतु जब बात अपनी जीवन यात्रा की हो तो? क्या हम इसकी तैयारी करते हैं कि हमारी जीवन यात्रा सकुशल संपन्न हो सके। हमें तथा हमारे आश्रितों को पैसे की कोई तंगी न हो? जब कुछ दिनों की यात्रा के लिए हम पूरी तैयारी करते हैं तो क्यों सालों-साल लंबी जीवन यात्रा के लिए वैसे ही जतन नहीं करते?
सेवानिवृत्ति के बाद के लिए:
यदि जीवन भर के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और कमाई के उपाय हों तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। परंतु हकीकत में ऐसा नहीं होता। एक दिन ऐसा आएगा जब हमारे मानवीय जीवन का मूल्य शून्य होगा। उस दिन हमें अपने खुद के लिए तथा अपने आश्रितों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। लिहाजा हमें रिटायरमेंट प्लानिंग पर पूरा ध्यान देना चाहिए। महज फौरी वित्तीय प्लानिंग के बजाय हमें रिटायरमेंट के हिसाब से प्लानिंग करनी चाहिए। ताकि बुढ़ापे के वक्त हमारे पास इतनी संग्रहीत संपत्तियां हों, जिनसे पर्याप्त धनार्जन के साथ 'वित्तीय मोक्ष' प्राप्त हो सके।
इन दिनों सुनिश्चित लाभ वाली योजनाएं खत्म हो रही हैं। संयुक्त परिवारों का स्थान छोटे एकल परिवारों ने ले लिया है। लिहाजा रिटायरमेंट प्लानिंग का महत्व पहले से ज्यादा है। रिटायरमेंट प्लान सामूहिक के बजाय व्यक्तिगत आय के लक्ष्य पर केंद्रित होने चाहिए। जब तक ऐसे रिटायरमेंट प्लान नहीं आते तब तक प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सेवानिवृत्ति के लिहाज से सकारात्मक समाधान खोजने चाहिए।
न्यूयॉर्क टाइम्स में एक रोचक लेख छपा था। इसमें एक वित्तीय दूरदृष्टा टिमोथी बोवर्स की कहानी कही गई थी, जिसने अपनी सेवानिवृत्ति आय की कमी को पूरा करने के लिए एक बैंक में डाका डाला और पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसका कहना था कि यदि उसे बूढे़ अपराधियों की जेल में डाला गया, जहां सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ इलाज की भी बेहतर सुविधा होती है, तो वह अपनी बाकी की जिंदगी आराम से गुजार देगा और इस तरह अपने रिटायरमेंट लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। हममें से बहुत कम हताश लोग इस तरह का कदम उठाने के बारे में सोचेंगे। लिहाजा हमें रिटायरमेंट प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। खास कर भारत जैसे देश में, सामाजिक सुरक्षा का कोई समुचित तंत्र नहीं है। यहां हम कारगर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए जरूरी कुछ बातों का जिक्र कर रहे हैं :
विस्तृत वित्तीय योजना:
वारेन बफेट ने कहा था, 'निवेश में कामयाबी तो सामान्य सूझबूझ से भी मिल सकती है। लेकिन ज्यादा जरूरी यह है कि हम ऐसा कोई काम न करें जिनसे हमारा निवेश संकट में फंस जाए।'
रिटायरमेंट प्लान का पहला कदम है अपनी रिप्लेसमेंट आय का हिसाब लगाना। इसके तहत कर्मचारी की मौजूदा आय की तुलना रिटायरमेंट बाद प्राप्त होने वाली बचतों आदि से की जाती है। इससे पता चलता है कि कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद अपने मौजूदा जीवनस्तर को बनाए रखने लायक निवेश व बचत कर रहा है या नहीं। रिटायरमेंट बाद भी समान जीवनस्तर के लिए कर्मचारी को नौकरी के वक्त की 75 फीसद आय के बराबर आमदनी की जरूरत होगी।
महंगाई से सुरक्षा:
महंगाई से सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपकी आय की क्रय शक्ति आगे भी वही रहनी चाहिए जो अभी है। तीन फीसद सालाना महंगाई दर के हिसाब से खर्च करने की क्षमता दस सालों में 25 फीसद घट जाती है। महंगाई दर छह फीसद हो तो क्रय शक्ति में इतनी कमी पांच सालों में ही आ जाएगी।
जोखिम से बचाव:
हम आज इसलिए निवेश करते हैं ताकि कल उससे कमाई हो सके। लेकिन इसमें नुकसान भी संभव है। इसलिए हमें जोखिम और रिटर्न दोनों का हिसाब लगाना चाहिए। पैसे को बचत खाते में डालकर कोई अमीर नहीं बन सकता। जोखिम लेना जरूरी है। लेकिन जोखिम को कम रखते हुए ज्यादा से ज्यादा कमाई पर ध्यान देना चाहिए।
जल्द व नियमित निवेश:
जितनी जल्दी निवेश प्रारंभ करेंगे उतना फायदा होगा। 25 साल की उम्र से सालाना 60 हजार रुपये का निवेश शुरू करते हैं तो (सालाना आठ फीसद रिटर्न अनुसार) रिटायरमेंट तक एक करोड़ से ज्यादा राशि एकत्र कर लेंगे। परंतु 40 वर्ष बाद इससे दूना निवेश करते रहने पर भी आधे पैसे ही बनेंगे। यह सीमित ओवर मैच जैसा है। आखिरी ओवरों में धुआंधार बल्लेबाजी से बेहतर है कि शुरू से ही हर ओवर में नियमित रूप से रन बनाए जाएं।
विविधीकरण:
भले ही हमें लगता हो कि हमारे मकान में आग नहीं लगेगी या कार दुर्घटनाग्रस्त नहीं होगी, परंतु ऐसा हो सकता है। यही वजह है कि हम मकान या कार का बीमा कराते हैं। ठीक यही बात निवेश पर लागू होती है। अगर हम सोचें की जिस शेयर में पैसा लगाया है वह कभी घटेगा नहीं, तो ऐसा संभव नहीं है। इसीलिए एक ही असेट श्रेणी में सारा पैसा लगाने के बजाय विभिन्न असेट श्रेणियों में निवेश करना चाहिए।
जीवन बीमा:
मानवीय पूंजी का एक अनोखा पहलू मृत्यु का जोखिम है। असमय मृत्यु और भी दुखद है। इसीलिए जीवन बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जितना ज्यादा मृत्यु का जोखिम, उतना ज्यादा जीवन बीमा कवरेज। जीवन बीमा और उपयुक्त असेट आवंटन को अलग-अलग करने के बजाय एक साथ करना चाहिए।
जिंदगी के पड़ाव:
जीवन को विभिन्न कालखंडों में बांटा जा सकता है। जैसे 23 साल तक (दूसरों की देखरेख में), 23-35 साल (कमाई का शुरुआती दौर), 35-60 साल (परिवारिक जिम्मेदारियों का दौर) तथा 60 साल से ऊपर (परलोक चिंतन)। प्रत्येक चरण की आवश्यकताएं अलग होती हैं। लिहाजा रणनीति और असेट आवंटन भी अलग होने चाहिए। इसके अलावा सिस्टेमेटिक/पार्शियल विड्रॉल (एसडब्ल्यूपी) योजनाएं अपनानी चाहिए। 'सडेन मनी' के लेखक सूजन ब्रैडले के अनुसार रिटायर्ड लोगों को अपने पैसे को आवश्यकताओं की 'बाल्टियों' में बांटना चाहिए। पहली बाल्टी खाद्य सामग्री, कपड़े-लत्ते, मनोरंजन, परिवहन व यात्रा के खर्चो के लिए। दूसरी प्रापर्टी टैक्स, पर्सनल टैक्स व बीमा प्रीमियम जैसे निश्चित व अनिवार्य खर्चो तथा तीसरी आपात खर्चो के लिए होनी चाहिए। चौथी बाल्टी में निवेश का धन होगा। यदि पहली तीन बाल्टियों में सोच-समझकर पैसे डाले गए तो चौथी में पैसों का मूल्य बुनियादी जीवनस्तर बनाए रखने लायक होगा।


What do we prepare our life is to be a safe ride. There is no shortage of money to us and our dependents?

According to a gnome to moneymaking Sanskrit, is a purpose to protect and enhance it. Earnings without spending mountains of money is destroyed.

For several days traveling by train as far as we are prepared. We will pack the goods. Way of eating - drinking are also arranged so that our journey is safely possible. If you do not get good food on the train that makes the necessary precautions. But when it comes to his career? What do we prepare our life is to be a safe ride. There is no shortage of money to us and our dependents? When we prepared for a couple days so why Years - year journey for long life, just do not save?

For retirement:

If the measure of lifetime earnings if sufficient financial resources and do not need to worry. But in reality it is not. A day will come when our human life worth zero. For themselves and their dependents that day we will require substantial financial resources. So we should pay attention to retirement planning. The immediate financial planning rather than merely in terms of retirement planning, we should. We're so stored during aging properties, with whom earn enough ' financial salvation can be obtained.

Ensure benefit plans these days are over. Small nuclear families of joint families has taken place. So more than ever the importance of retirement planning. Retirement plan should be focused on collective rather than individual income. Retirement plan that do not come until his retirement in terms of each person must find positive solutions.

The New York Times had an interesting article appeared. Desperate people take very few of us think about such a move. So we should focus on retirement planning. Especially in a country like India, social security is not a proper mechanism. Here we mention a few things needed for effective retirement planning are:

Detailed Financial Plan:

Warren Buffett said, 'investment success can also be found in the usual sense. But more important is that we do not have any work to which our investment is in trouble."

Replacement income your retirement plan is the first step of the calculation. After comparing the current earnings of the employer retirement savings, etc. are obtained. This shows that the employee after retirement to maintain their current standard of living or not worth the investment and saving. The same standard of living after retirement, when the employee income amounts to 75 per cent of the income will be needed.

Inflation protection:

Inflation protection is extremely important. Beyond the purchasing power of your income should remain the same which is right now. Three per cent annual inflation rate of 25 per cent in ten years of spending power decreases. If inflation is six per cent drop in purchasing power will come in five years.

Risk avoidance:

Investing today for tomorrow so that we could have gotten him. But it is also possible damage. So we should ascertain both risk and return. Anyone can become rich by putting money in a savings account. The risk is necessary. But while minimizing risk should focus more on earnings.

Early and regular investments:

Will begin as soon as investment gains. 60 thousand rupees annually from age 25 to start investing the (annual return of eight percent) over a million by retirement funds will be collected. But 40 years later, on the double, half the money will be invested. It’s like a limited overs match. Last overs batting better than dashing all over from the beginning to the regular runs.

Diversification:

Even if we think that it will not fire in our house or car will not crashing, but it can happen. That is why we insure a house or car. The same thing applies to investment. If we think he's ever put money into the stock does not fall, then it is not possible. So instead of putting all the money in one asset class to invest in various asset classes.

Life Insurance:

A unique aspect of human capital is the risk of death. Untimely death is even more tragic. That's why life insurance is provided. The higher risk of death, the more life insurance coverage. Life insurance and appropriate asset allocation individually instead must simultaneously.

Life stage:

Life can be divided into different periods. Like 23 years (under the supervision of others), 23-35 years ( beginning of earnings ), 35-60 years ( age, family responsibilities ) and 60 years (up to otherworldly contemplation ). The requirements are different for each stage. So the strategy and asset allocation should be different. Further systematic / partial the income (SWP) schemes should adopt. "Sudden Money ' author Susan Bradley retired in accordance with the requirements of their money ' buckets ' to dispense. The first bucket food, clothing - rag, entertainment, transportation and travel expenses for. The second property tax, personal tax and insurance premium costs as fixed and necessary expenses must be for the third emergency. The funds will be invested in the fourth bucket. In the first three buckets deliberately injected money into the fourth would be worth the value of money to maintain a basic standard of living.